| 1 |
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إني |
أفدت |
من |
استفدت |
علوماً |
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    ***     |
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منه |
ولم |
أكُ |
بالأمور |
عليما |
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| 2 |
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    ***     |
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إنَّ |
التعلقَ |
لا |
يكون |
قديما |
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| 3 |
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بالذاتِ |
يعلم |
لا |
بأمرٍ |
زائد |
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    ***     |
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إن |
كنتَ |
علاَّماً |
وكنتَ |
حليما |
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| 4 |
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لا |
تنظرنَّ |
العلم |
أمراً |
زائداً |
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    ***     |
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فتكن |
جهولاً |
بالأمور |
ظَلُوما |
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| 5 |
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لا |
يحجبنكَ |
ما |
ترى |
من |
فائتٍ |
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    ***     |
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فالحقُّ |
كلمَ |
عبدَه |
تكليما |
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| 6 |
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يأتي |
بأمرٍ |
ثمَّ |
ينسخُ |
حكمَهُ |
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    ***     |
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| 7 |
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بلسانِ |
شخصٍ |
صادقٍ |
من |
رسلهِ |
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    ***     |
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صلُّوا |
عليه |
وسلِّموا |
تسليما |
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| 8 |
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قد |
قال |
في |
القرآنِ |
في |
مزبوره |
|
    ***     |
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إنَّ |
البلاءَ |
يولدُ |
المعلوما |
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| 9 |
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والعلمُ |
يحدث |
من |
حدوثِ |
بلائه |
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    ***     |
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وهو |
التعلق |
فافهموا |
التحكيما |
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| 10 |
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انظر |
إلى |
الضدّين |
كيفَ |
تماثلا |
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    ***     |
|
حتى |
يقالُ |
منَ |
اللديغِ |
سليما |
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