| خُصصتُ |
بعلم |
لم |
يُخصَّ |
بمثله |
|
*** |
| سواي |
من |
الرحمن |
ذي |
العرش |
والكرسي |
|
|
وأُشهدتُ |
من |
علم |
الغيوبِ |
عجائباً |
|
*** |
| تُصان |
عن |
التَّذكارِ |
في |
عالم |
الحسِّ |
|
| فيا |
عجباً |
أني |
أروح |
وأغتدي |
|
*** |
| غريباً |
وحيداً |
في |
الوجود |
بلا |
جنسِ |
|
| لقد |
أنكر |
الأقوام |
قولي |
وشنّعوا |
|
*** |
| عليّ |
بعلمٍ |
لا |
ألوم |
به |
نفسي |
|
| فلا |
هُم |
مع |
الأحياء |
في |
نور |
ما |
أرى |
|
*** |
| ولا |
هُم |
مع |
الأموات |
في |
ظلمة |
الرمسِ |
|
| فسبحان |
من |
أحيى |
الفؤاد |
بنوره |
|
*** |
|
وأفقدهم |
نورَ |
الهداية |
بالطمسِ |
|
| علومٌ |
لنا |
في |
عالم |
الكون |
قد |
سرت |
|
*** |
| من |
المغرب |
الأقصى |
إلى |
مطلع |
الشمسِ |
|
| تحلّى |
بها |
من |
كان |
عقلا |
مجرّداً |
|
*** |
| عن |
الفكرِ |
والتخمينِ |
والوهمِ |
والحدسِ |
|
| وأصبحتُ |
في |
بيضاء |
مثلي |
نقيّة |
|
*** |
| إماماً، |
وإن |
الناس |
منها |
لفي |
لبسِ |
|